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और तेरी ज़ुल्फ़ में ख़म' हो तो ग़ज़ल होती है

हज़ल

इक दवात' एक क़लम' हो तो ग़ज़ल होती है
 
जब ये सामान बहम' हो तो ग़ज़ल होती है 

मुफ़लिसी' इश्क़, मरज़' भूक, बुढ़ापा, औलाद 
दिल को हर क़िस्म का ग़म हो तो ग़ज़ल होती है 

भूत आसेब 'शयातीन' अजम्बह' हमज़ाद' 
इन बुज़ुर्गों का करम हो तो ग़ज़ल होती है 

शे'र नाज़िल' नहीं होता कभी लालच के बग़ैर 
दिल को उम्मीदे-रक़म' हो तो ग़ज़ल होती है 

तन्दरुस्ती भी ज़रूरी है तग़ज़्ज़ुल' के लिए 
हाथ और पाँव में दम हो तो ग़ज़ल होती है 

पूँछ कुत्ते की जो टेढ़ी हो तो कुछ भी न बने 
और तेरी ज़ुल्फ़ में ख़म' हो तो ग़ज़ल होती है 

सिर्फ़ ठर्रे' से तो क़तआत' ही मुमकिन हैं 'फ़िगार' 
हाँ, अगर व्हिस्कि-ओ-रम हो तो ग़ज़ल होती है
         
( दिलावर फ़िगार )

अमरीका शेर पढ़ने गये थे हमारे दोस्त

        हज़ल

दिलावर फ़िगार (पाकिस्तान)

अमरीका शेर पढ़ने गये थे हमारे दोस्त
खुद दाद लेके आ गये सामान रह गया !

दीवान ए  हाफिज़ इतना पढा एक शख्स  ने
खुद  भी वो होके  हाफिज़ ए  दीवान  रह गया !!

खुश  किस्मती  से हम हैं सवार उस जहाज़ पर
साहिल पर जिस जहाज़ का कप्तान रह गया !!

हर  शख्स पर है कुफ़्र का  फ़तवा  लगा हुआ
यूं  है  तो  एक  मैं  ही  मुसलमान  रह  गया !!

अजब अखबार लिक्खा जा रहा है

दिलावर फ़िगार (पाकिस्तान )

अजब अखबार लिक्खा जा रहा है
कि मंशा  वार लिक्खा जा रहा है

लिखी है हाले दिल ए दिल में हाए हौवज
ये हाल ए ज़ार लिक्खा जा रहा है

कही गोली लिखा है और कही मार
ये गोली मार लिक्खा जा रहा है

मैं रिश्ता दार हूँ उस का सो मुझ को
सिरिश्ता दार लिक्खा जा रहा है

मिज़ाज ए  यार  बरहम है कि उसकी
मजाज़ ए यार लिक्खा जा रहा है

समुन्दर पार पढ़ने जा रहा हूँ
समुन्दर पार लिक्खा जा रहा है



आइ राइट इन उर्दू

दिलावर फ़िगार

दि नेशन टाक्स इन उर्दू, दि पीपुल फ़ाइट इन उर्दू
डियर रीडर देट इज़ व्हाइ, आइ राइट इन उर्दू

न हो जब हार्ट इन दि चेस्ट तो फिर टंग इन दि माउथ क्यों
टु ब्युटिफ़ाय धिस लाइन, थ्रो सम लाइट इन उर्दू

पोइटरी की नशिश्तें, कल्चरल शो ही सही लेकिन
पलीज़ ऎ साहेबान-ए-दिल मुझे इंवाइट इन उर्दू

मेरी नज़्मों का ये मजमूआ है पब्लिश्ड उर्दू में
दियरफोर आइ वुड लाइक ऎ कापी राइट इन उर्दू

दियर शुड बी यक़ीनन नो मिलावट इन दि लिटरेचर
दियरफोर आइ नेवर काल शब को नाइट इन उर्दू

फ़िगार इस नज़्म में तेरी ज़ुबाँ उर्दू हो आर इंग्लिश
मगर लिक्खे हैं तूने क़ाफ़िए क्या टाइट इन उर्दू